इंसानियत का धर्म अनिरुद्ध शर्माअप्रैल 26, 2022 एक सौदागर को बाज़ार में घूमते हुए एक उम्दा नस्ल का ऊंट दिखाई पड़ा! सौदागर और ऊंट बेचने वाले के बीच काफी लंबी सौदेबाजी हुई और आखिर में ...Read More
जीवन चलने का नाम अनिरुद्ध शर्मादिसंबर 18, 2018 मेरी मेरी मेहनत कभी थमी नहीं मेरे प्रयास में आई कभी कमी नहीं लाख हार मिली हो राह में फिर भी आँखों में आई नमी नहीं - अनिरुद्ध श...Read More
मोदी तेरे करने में कोई कसर नहीं अनिरुद्ध शर्मादिसंबर 14, 2018 पिछले ३ दिन से मन बड़ा उदास था, कई राज्यों में चुनाव के नतीजे आये है जिन्हें देख मन बड़ा दुखी हुआ। तो कलम ने ये पंक्तियाँ निकली। Read More
राजनीति के पितामह को नमन अनिरुद्ध शर्माअगस्त 18, 2018 परसों १६ अगस्त २०१८ को हमने भारत वर्ष की राजनीती के पितामह को खो किया था. डॉ कलाम के जाने के बाद पहली बार किसी राजनेता के जाने पर इतना दुःख...Read More
हार की जीत अनिरुद्ध शर्माअक्टूबर 27, 2017 ज़िन्दगी के हर कदम पर नाकाम रहता हूँ कुछ नया करने की चाह में बदनाम रहता हूँ Read More
अस्पताल का हाल अनिरुद्ध शर्माअक्टूबर 21, 2017 डर बैठाओ, पैसा कमाओ । मेरी मानो , सच को जानो आयुर्वेद और योग मिटाये सब रोग ना डॉटर न अस्पताल के चक्कर स्वस्थ शरीर से जियो जीवन जी भर ...Read More
मेरे देश को शांति पसंद है अनिरुद्ध शर्मासितंबर 16, 2017 आसमान धुंधला है और समाज जल रहा है क्यों कहते हो कि मेरा देश बदल रहा है दंगा फसाद, भ्र्ष्टाचार फैला है सब जगह कैसे मान लूँ की अच्छे दिनों...Read More
थोड़ी मोहलत दे दे जिंदगी अनिरुद्ध शर्माजुलाई 09, 2017 ज्यादा वक्त नही चाहिए मुझे ज़िन्दगी थोड़े वक्त में कारनामे दिखाने का हुनर रखता हूँ मै Read More
माँ अनिरुद्ध शर्माजून 26, 2017 माँ को लब्जों में जो पिरोने बैठा मैं लेके कलम हाथ में कलम भी टूट के बोली माँ को बयां करना नहीं है मेरी ओकात में Read More
जल्दबाजी अनिरुद्ध शर्माजून 20, 2017 न जाने कैसी जल्दबाजी घुस आई है हर इंसान में कोई रहना ही नहीं चाहता मेरे हिंदुस्तान में हर तरफ जाम और गाड़ियों का शोर शराबा है मानो घुस...Read More
पैसे के नशे में चूर हो कर अनिरुद्ध शर्माफ़रवरी 20, 2017 अभी समय के हाथ मजबूर हो कर पैसे के नशे में चूर हो कर जी रहें है ज़िन्दगी अपने माँ बाप से दूर हो कर बच्चों के पास बाबा दादी नही ...Read More
हमारा तराजू अनिरुद्ध शर्माफ़रवरी 16, 2017 पैसे लुटाने वाले को बड़े दिल का कह दिया और उनका क्या जो प्यार का खजाना लिए बैठे हैं Read More
माँ अनिरुद्ध शर्माफ़रवरी 13, 2017 मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा देख लिया धरती पाताल अंबर सारा देख लिया स्वर्ग हे सिर्फ माँ के चरणों में ऊपर वाले का ये इशारा देख लिया Read More
हमारी सदी अनिरुद्ध शर्माफ़रवरी 10, 2017 यही इक्कीसवीं सदी की पहचान हे भूली संस्कृति भूला विधान हे Read More
एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है अनिरुद्ध शर्माफ़रवरी 06, 2017 अपने मन की खुशी जिससे कोसो दूर है एक जिम्मेदार आदमी हर तरफ से मजबूर है बचपन था जब बहन की माँगे याद आई ...Read More