लता मंगेशकर जी
93 वर्ष का इतना सुन्दर और धार्मिक जीवन विरलों को ही प्राप्त होता है। लगभग पाँच पीढ़ियों ने उन्हें मंत्रमुग्ध हो कर सुना है.... और हृदय से सम्मान दिया है। उनके पिता ने जब अपने अंतिम समय में घर की बागडोर उनके हाथों में थमाई थी, तब उस तेरह वर्ष की नन्ही जान के कंधे पर छोटे छोटे चार बहन-भाइयों के पालन की जिम्मेवारी थी। लता जी ने अपना समस्त जीवन उन चारों को ही समर्पित कर दिया। भारत पिछले अस्सी वर्षों से लता जी के गीतों के साथ जी रहा है। हर्ष में, विषाद में,ईश्वर भक्ति में, राष्ट्र भक्ति में, प्रेम में, परिहास में... हर भाव में लता जी का स्वर हमारा स्वर बना है।लता जी गाना गाते समय चप्पल नहीं पहनती थीं। गाना उनके लिए ईश्वर की पूजा करने जैसा ही था। कितना अद्भुत संयोग है कि अपने लगभग सत्तर वर्ष के गायन कैरियर में लगभग 36भाषाओं में हर रस/भाव के 50 हजार से भी अधिक गीत गाने वाली लता जी ने अपना पहले और अंतिम हिन्दी फिल्मी गीत के रूप में भगवान भजन ही गाया है।
लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर हुआ। इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक भी थे इसलिए संगीत इन्हें विरासत में मिली। लता मंगेशकर का पहला नाम 'हेमा' था, मगर जन्म के 5 साल बाद माता-पिता ने इनका नाम 'लता' रख दिया था। लता अपने सभी भाई-बहनों में बड़ी हैं।
इनके जन्म के कुछ दिनों बाद ही परिवार महाराष्ट्र चला गया। लता ने केवल 5 साल की उम्र में ही अपने पिता के मराठी संगीत नाट्य में कार्य किया। 1942 में इनके पिता की मौत हो गई। इस दौरान ये केवल 13 वर्ष की थीं। इनके पिता के दोस्त मास्टर विनायक (विनायक दामोदर कर्नाटकी) ने इनके परिवार को संभाला और लता मंगेशकर को एक सिंगर और अभिनेत्री बनाने में मदद की। कुछ समय बाद लता मंगेशकर मुंबई चली गईं। यहां उन्होंने हिन्दुस्तान क्लासिकल म्यूजिक के उस्ताद अमानत अली खान से क्लासिकल संगीत सीखना शुरू कर दिया। लता मंगेशकर ने अपने संगीत करियर की शुरुआत मराठी फिल्मों से की। इसके बाद इन्होंने विनायक की हिन्दी फिल्मों में छोटे रोल के साथ-साथ हिन्दी गाने तथा भजन गाए। इसी दौरान उनकी मुलाकात वसंत देसाई से हुई। 1947 में भारत बंटवारे के बाद उस्ताद अमानत अली पाकिस्तान चले गए। लता ने उस्ताद बड़े गुलाम अली खान, पंडित तुलसीदास शर्मा तथा अमानत खान देवसल्ले से संगीत सीखा। 1948 में विनायक की मौत के बाद गुलाम हैदर लता के संगीत मेंटर बने। हैदर ने लता की मुलाकात शशधर मुखर्जी से कराई, जो 'शहीद' फिल्म बना रहे थे। उन्होंने लता की ज्यादा पतली आवाज होने के कारण उन्हें अपने फिल्म में गाने का मौका नहीं दिया। लता मंगेशकर ने पहली बार 1958 में बनी 'मधुमती' के लिए सलिल चौधरी द्वारा लिखे गए गीत 'आजा रे परदेशी' के लिए 'फिल्म फेयर अवार्ड फॉर बेस्ट फिमेल सिंगर' का अवॉर्ड जीता। 1950 से पहले लता ने सी. रामचंद्र के लिए कई गाने गाए। 1961 में लता ने लोकप्रिय भजन 'अल्लाह तेरो नाम' और 'प्रभु तेरो नाम' जैसे भजन गाए।
1963 में जवाहरलाल नेहरू की उपस्थिति में देश का सबसे जीवंत गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाया। इस गाने के बाद नेहरू की आंखों से आंसू बह निकले थे। लता मंगेशकर भारतीय संगीत में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए 1969 में पद्मभूषण, 1999 में पद्मविभूषण, 1989 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड, 1999 में महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड, 2001 में भारतरत्न, 3 राष्ट्रीय फिल्म अवॉर्ड, 12 बंगाल फिल्म पत्रकार संगठन अवॉर्ड तथा 1993 में फिल्म फेयर लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार सहित कई अवॉर्ड जीत चुकी हैं। लता जी ने 1948 से 1989 तक 30 हजार से ज्यादा गाने गाए हैं, जो एक रिकॉर्ड हैं। लता मंगेशकर ने अपने छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी के चलते कभी शादी नहीं की थी। अपने छोटे भाई बहनों को सँभालते हुए 6.02.22 को 93 वर्ष की उम्र में बिना किसी से सेवा लिए, स्वस्थ शरीर के साथ संसार से पलायन कर गयी।
शत शत प्रणाम
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