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देश द्रोही
अनिरुद्ध शर्मा
दिसंबर 09, 2015
कविता
हर शख्स यही कह बैठता है लालच की आड़ में
" अपनी सोच, देश गया भाड में "
-अनिरुद्ध शर्मा
देश द्रोही
Reviewed by
अनिरुद्ध शर्मा
on
दिसंबर 09, 2015
Rating:
5
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